गजल गायकी
शब्दों में जिस समय हम, चिनगारियाँ लिखेगे
आंगन में बालकों की, किलकारियाँ लिखेंगें ।
ऊँगली चुभाएँगें दृढ़ पतझड़ की आँख में जब
उस दिन बसन्त की हम तैयारियाँ लिखेंगें
जिस रोज दूरदर्शन फ्रिज, कार सौपं देंगें
बचपन के भाग्य में तब दुश्वारियाँ लिखेंगे ।
बेटी जवान होगी बुधिया औ' रामजस की
उस रोज बाप की हम लाचारियाँ लिखेंगें
कसकेंगें पीठ वाले जब जख्म कुछ हमारे
उस वक्त दोस्तों की ऐयारियां लिखेंगें
खादी की झिलमिलती पोशाक देखते ही
सत्ता के जमूरों की बदकारियां लिखेंगें
पिघलाएगी धरित्री सूरज की आग एक दिन
सरसब्ज पेड़ के हित जब आरियाँ लिखेगें ।
कुछ धोख से इशारे कर देगा ढीठ मौसम
तब उनके नाम रंग की पिचकारियाँ लिखेंगें
आएगा 'यायावर' जब इस घर की देहरी पर
आंगन में पुष्पगन्धा कुछ क्यारियाँ लिखेंगें।
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