गजल हिंदी में लिखी हुई

दिल बिछा दूँगा जिधर से भी गुजर जाओगे, 

तुम मेरी नजरों से बच करके किधर जाओगे।



इस शहर में आए हो जिस राह से गुजरे हो अभी,

उससे एहसास हुआ मेरे ही घर जाओगे।


अपनी पलकों पे बिठा कर मैं तुम्हें रखूँगा, 

मेरे कहने पे जो एक रोज ठहर जाओगे। 


तुम जमाने की निगाहों से बचोगे कब तक 

सब तुम्हारे ही दीवाने हैं किधर जाओगे। 


जब न होगे तो खयालों में उतारूंगा 'वसीम' 

बन के तस्वीर निगाहों में संवर जाओगे।

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