बुद्धितब्धि एवं उसका मापन:- बुद्धि परीक्षण का आधार मानसिक एवं शारीरिक आयु के मध्य का संबंध है। बुद्धि परीक्षा के परिणाम बुद्धि लब्धि के द्वारा दिखाये जाते हैं। बुद्धि लब्धि मानसिक आयु के अभाव में मापी नहीं जा सकती। मानसिक आयु मानसिक आयु बालक या व्यक्ति की सामान्य मानसिक योग्यता बताती है। गेट्स के अनुसार मानसिक आयु हमें किसी व्यक्ति की बुद्धि परीक्षा के समय बुद्धि परीक्षा द्वारा ज्ञात की जाने वाली सामान्य मानसिक योग्यता के बारे में बताती है। बुद्धिलब्धि का अर्थ:- बुद्धिलब्धि, बालक या व्यक्ति की सामान्य योग्यता के विकास की गति बताती है। कोल के शब्दों में "बुद्धिलब्धि यह बताती है कि मानसिक योग्यता में किस गति से विकास हो रहा है।" बुद्धिलब्धि निकालने की विधि मानसिक आयु का विचार आरंभ करने का श्रेय बिने को प्राप्त है। बुद्धि लब्धि निकालने का सूत्र -
बुद्धि परीक्षाओं को सामान्य रूप से दो वर्गों में विभाजित किया जाता है- 1. वैयक्तिक
2. सामूहिक
1. वैयैयक्तिक बुद्धि परीक्षा:- यह परीक्षा एक समय में एक व्यक्ति की ली जाती है।
2. सामूहिक बुद्धि परीक्षा:- यह परीक्षा एक समय में अनेक व्यक्तियों की ली जाती है। इसका आरंभ प्रथम विश्वयुद्ध के समय अमरीका में हुआ। वैयक्तिक और सामूहिक बुद्धि परीक्षाओं के निम्न रूप होते है।
1. शाब्दिक
2. अशाब्दिक
3. क्रियात्मक शाब्दिक परीक्षण वह है जिन्हें हल करने के लिये शाब्दिक या भाषा का ज्ञान आवश्यक होता है अर्थात अक्षरों एवं शब्दों के ज्ञान के साथ संख्या ज्ञान भी आवष्यक है। अशाब्दिक परीक्षण में प्रष्नों के उत्तर चित्रों, आकारों व अन्य सामाग्रियों के माध्यम द्वारा दिये जाते हैं। जिस देष में कई भाषा बोली जाती है उस देष के लोगों की बुद्धि परीक्षण के लिये अशाब्दिक बुद्धि परीक्षाओं का ही उपयोग किया जाता है। क्रियात्मक इसका मुख्य उद्देश्य होता है कि व्यक्ति को लिखने पढ़ने का कितना ज्ञान है। क्रियात्मक परीक्षा में उन व्यक्तियों की परीक्षा ली जाती है जिनको भाषा का कम ज्ञान होता है या जो लिखना पढ़ना नहीं जानते इस परीक्षा विधि में वास्तविक वस्तुओं का प्रयोग किया जाता है और परीक्षार्थियों से कुछ समस्यापूर्ण कार्य करने के लिये कहा जाता है।
