गजल हिंदी

 सबसे बड़ा रूपैया 

चहल-पहल चेहरों परलेकिन हर दिल में तनहाई है।
 प्यार-वफा भाईचारे की तंगी है महँगाई है ॥


 बिगड़े मौसम के मिजाज को दौरे तरक्की मत कहिए।
 इसके जहरीले झोंकों से झुलस रहीं अमराई है । 

कब तक अपनी खैर मनाये बेचारा मजलूम, जहां सरेआम कानून- दफा से होती हाथापाई है ।

 हम किस चश्मे से देखे अब इस आजाद खयाली को ।

नये दौर के पहनावों को देख हया शरमाई है ।।

 दो बातें माँ-बाप से करना भूल कमाऊ पूत गया ।
 सच है - सबसे बड़ा रूपइया बाप बड़ा न भाई है ।।






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