सबसे बड़ा रूपैया
चहल-पहल चेहरों परलेकिन हर दिल में तनहाई है।
प्यार-वफा भाईचारे की तंगी है महँगाई है ॥
बिगड़े मौसम के मिजाज को दौरे तरक्की मत कहिए।
इसके जहरीले झोंकों से झुलस रहीं अमराई है ।
कब तक अपनी खैर मनाये बेचारा मजलूम, जहां सरेआम कानून- दफा से होती हाथापाई है ।
हम किस चश्मे से देखे अब इस आजाद खयाली को ।
नये दौर के पहनावों को देख हया शरमाई है ।।
दो बातें माँ-बाप से करना भूल कमाऊ पूत गया ।
सच है - सबसे बड़ा रूपइया बाप बड़ा न भाई है ।।
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