सूखी मालिश कैसे करें?

 स्वास्थ्य वृद्धि का एक सस्ता सुलभ साधन है- सूखी मालिश वस्तुतः तेल मालिश का भी मुख्य उद्देश्य वही है, जो सूखी मालिश का। दोनों में भेद सुविधा की ही दृष्टि से किया गया है। सूखी मालिश से त्वचा उद्दीप्त हो उठती है। शरीर का व्यायाम भी हो जाता है। त्वचा की मृत परतें इससे झड़ जाती हैं। विजातीय द्रव्यों के निष्कासन की प्रक्रिया तीव्र हो जाती है। रक्त नलिकाएँ अपना कार्य मुस्तैदी से करती हैं और रक्त संचार गति में तीव्रता आती है। हारमोन ग्रंथियाँ एवं तेल उत्पादक ग्रंथियाँ भी सक्रिय हो उठती हैं। स्नायविक प्रवाह में गति आती है। पेशियाँ मजबूत बनती हैं। वसा का शरीर में संतुलित वितरण होता है। इस प्रकार शरीर में नवीन स्फूर्ति, शक्ति तथा दीप्ति आती है। असमय शरीर जीर्णता की संभावना घटती है। तेल मालिश करने वालों को भी यदा-कदा पहले सूखी मालिश करके बाद में तेल मालिश कर धूपसेवन करना चाहिए। इसी प्रकार सूखी मालिश करने वालों को कभी-कभार तेल मालिश कर लेनी चाहिए। तिल या सरसों का तेल अपनी प्रकृति के अनुसार चुना जा सकता है। बादाम तथा जैतून का तेल भी लाभकारी होता है।


सूखी मालिश के लिए सूखी तौलिया का उपयोग उत्तम रहता है। तौलिया न हो तो मोटे खुरदरे कपड़ों से भी वही कार्य किया जा सकता है। संपन्न वर्ग के लोग इस हेतु सुअर के बालों के ब्रुश का प्रयोग करते हैं, किंतु उसके प्रयोग से बचना ही अच्छा है। सूखी मालिश पैर की एड़ी से शुरू करनी चाहिए अपने शरीर की त्वचा की संवेदना को स्वयं ही भाँपकर उस पर उतना ही दबाव डालते हुए घर्षण करना चाहिए, जितना वह सह सके। पैर की एड़ी से शुरू कर ऊपर तक घिसना चाहिए। अधिक अच्छ हो कि बाएँ पैर की एड़ी से शुरू कर जाँघ तक आ के बाद, दूसरे पैर की एड़ी से फिर शुरू किया जाए

व ऊपर जाँघ तक तौलिया द्वारा रगड़ें। फिर दोनों हाथ व भुजाएँ। इसी प्रकार उँगलियों के पोरों से रगड़ना शुरू करें व कंधे के जोड़ तक पहुँचे। तदुपरांत पेडू से घर्षण प्रारंभ कर पीठ व पेट में सूखी मालिश करें। पीठ के घर्षण के लिए लंबे तौलिया को तिकोना लपेटा जा सकता है। पीठ-पेट के बाद गरदन, फिर मुँह व अंत में सिर की मालिश करें। गरदन एवं मुँह में भी घर्षण नीचे से ऊपर की ही ओर रहे। जबकि पूरे सिर में सूखा तौलिया गोलाकार घुमाएँ एवं सिर को उलट-पलटकर रगड़ें, जैसे साबुन से धोते समय करते हैं । 5 या 10 मिनट से अधिक घर्षण की आवश्यकता नहीं।


कौआ अपना घोंसला छोड़कर पूरब की ओर जाने की तैयारी करने लगा। कारण पूछने पर बुलबुल से उसने कहा- "यहाँ के लोगों को आवाज़ की परख करने की तमीज नहीं है।" बुलबुल ने कहा- "ताऊजी ! आपको आवाज सुधारनी पड़ेगी। नहीं तो पूरब वालों से भी आपको यही शिकायत करनी पड़ेगी।"

इसके उपरांत या तो गीली तौलिया से या फिर फुहारे से पुनः शरीर का घर्षण करें। जो लोग व्यवस्था कर सकें व सहन कर सकें, वे गरम तथा ठंडे पानी का फुहारा अदल-बदलकर लें। पहले गरम पानी का फिर उससे कम समय ठंढे का, पुनः गरम तदुपरांत ठंढा और फिर गरम पानी का फुहारा लेकर सबसे अंत में ठंढे पानी से नहाएँ। गरम पानी सिर में कम ही डालना चाहिए, अधिक समय तक नहीं। सूखी मालिश की यह प्रक्रिया शरीर के लिए निश्चित ही लाभकारी स्वास्थ्यप्रद सिद्ध होती है। इसे प्रत्येक वयस्क सदस्य को करना चाहिए। विशेष कर शीत ऋतु में इसका अभ्यास ताजगी देता है। दिनभर स्फूर्ति बनी रहती है।


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