हिंदी ग़ज़ल

 तिल का ताड़ बना देते हैं माहिर हैं

 सच में झूठ मिला देते हैं माहिर हैं

 जब भी मजहब की चिंगारी भड़की हैं

 उसको खूब हवा देते हैं माहिर हैं


धुआँ उठेगा और न शोले भड़केंगे

 ऐसी आग लगा देते हैं माहिर हैं।

 भूत, निशाचर सारे उनके चेले हैं

 उल्टा पाठ पढ़ा देते हैं माहिर हैं


 इनसे बंटवारा करने को मत कहना

 बन्दर - बांट करा देते हैं माहिर हैं

 मंच पे अपना जोशीला भाषण देकर

 जनता को लड़वा देते हैं माहिर हैं।

 

 बाँस रहे न बजे बाँसुरी कोई भी

जड़ से रोग मिटा देते हैं माहिर हैं

 रहते हैं आजाद ख्यालों में हरदम

 अच्छे शेर सुना देते हैं माहिर हैं।


हिंदी ग़ज़ल



हर इक दिल दुखों से भरा दोस्तों

 अजल हैं चमन की फजा दोस्तों 

यहीं एक चर्चा जमानों में है

 वो अपनों के हाथों मरा दोस्तों


 नहीं जानती ऐब दुनिया तो क्या

 खुदा से नहीं कुछ छिपा दोस्तो

 जुदा सबसे वो और सबसे हंसी

 जो इस से मिला फिर मिला दोस्तो


 करें कुछ भी अब वो हुकूमत में है

 जुबाँ खोलना है मना दोस्तों

 मिला लैला-मजनू को दुनिया में क्या

 ये है आँसुओं की जगह दोस्तों

 यही सोचकर चुप हैं खामोश हम

 बुतों से करें क्या गिला दोस्तों

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