Ctet 2022 बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र

 बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र :बाल विकास के सिद्धांत ctet 2022

 विकास की प्रक्रिया निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। यह जन्म से लेकर मृत्यु तक चलती रहती है। विकास की एक निश्चित दिशा होती है । यह सामान्य से विशेष की और बढ़ता है। यह विकास अनियमित रूप से नहीं होता है, बल्कि क्रमबद्ध, धीरे-धीरे व निश्चित समय पर होता है। यदपि विकास की गति व्यक्तिगत भिन्नता पर भी निर्भर करती है, लेकिन ऐसे सर्वमान्य सिद्धांत है जो विकास के हर क्षेत्र पर लागू होते है। विकास के मुख्य सिद्धांत निम्नलिखित है 

1- निरंतरता का सिद्धांत

विकास एक जीवन पर्यन्त प्रक्रिया है, जो गर्भधारण से लेकर मृत्यु पर्यन्त तक होती रहती है । 

2- विकास सामान्य से विशिष्ट की और चलता है। 

विकासात्मक परिवर्तन प्रायः व्यवस्थापरक, प्रगत्यात्मक और नियमित होते हैं। सामान्य से विशिष्ट और सरल से जटिल और एकीकृत से क्रियात्मक स्तरों की ओर अग्रसर होने के दौरान प्रायः यह एक पैटर्न का अनुसरण करते हैं। 

3- विकास बहुआयामी होता है। 

विकास बहु-आयामी होता, अर्थात् कुछ क्षेत्रों में यह बहुत तीव्र वृद्धि दर्शाता है, जबकि अन्य क्षेत्रों में इसमें कुछ कमियाँ देखने में आती हैं। 

4 परस्पर सम्बन्ध का सिद्धांत - 

विकासात्मक परिवर्तन बहु-आयामी और परस्पर संबद्ध होते हैं अनेक क्षेत्रों में यह परिवर्तन एक साथ एक ही समय पर हो सकते हैं, अथवा एक समय में एक भी हो सकता है। किशोरावस्था के दौरान शरीर के साथ-साथ संवेगात्मक, सामाजिक और संज्ञानात्मक क्रियात्मकता में भी तेजी से परिवर्तन दिखाई देते हैं। 

5- विकास बहूत ही लचीला होता है। 

विकास बहुत ही लचीला होता है। इसका तात्पर्य है कि एक ही व्यक्ति अपनी पिछली विकास दर की तुलना में किसी विशिष्ट क्षेत्र में अपेक्षाकृत आकस्मिक रूप से अच्छा सुधार प्रदर्शित कर सकता है। एक अच्छा परिवेश शारीरिक शक्ति, अथवा स्मृति और बुद्धि के स्तर में अनापेक्षित सुधार ला सकता है।

 6- विकास प्रसांगिक हो सकता है।

विकास प्रासंगिक हो सकता है। यह ऐतिहासिक परिवेशीय और सामाजिक-सांस्कृतिक घटकों से प्रभावित हो सकता है माता-पिता का देहांत दुर्घटना युद्ध भूचाल और बच्चों के पालन-पोषण के रीति-रिवाज ऐसे घटकों के उदाहरण हैं जिनका विकास पर प्रभाव पड़ सकता है। 

7 व्यक्तिक अंतर का सिद्धांत

 विकासात्मक परिवर्तनों की दर अथवा गति में उल्लेखनीय व्यक्तिगत अन्तर हो सकते हैं। यह अन्तर आनुवांशिक घटकों अथवा परिवेशीय प्रभावों के कारण हो सकते हैं। कुछ बच्चे अपनी आयु की तुलना में अत्यधिक पूर्व-चेतन हो सकते हैं, जबकि कुछ बच्चों में विकास की गति बहुत धीमी होती है। उदाहरणतया, यद्यपि एक औसत बच्चा 3 शब्दों के वाक्य 3 वर्ष की आयु में बोलना शुरू कर देता है, परन्तु कुछ ऐसे बच्चे भी हो सकते हैं जो 2 वर्ष के होने से बहुत पहले ही ऐसी योग्यता प्राप्त कर लेते हैं, जबकि कुछ ऐसे बच्चे भी हो सकते हैं जो 4 वर्ष की आयु होने तक भी पूरा वाक्य बोलने में सक्षम नहीं हो पाते। इसके अतिरिक्त, कुछ बच्चे ऐसे भी हो सकते हैं जो अपनी आयु की उच्चतम सीमा से ऊपर जाकर भी बोलने में सक्षम होते हैं। 

अन्य महत्वपूर्ण सिद्धांत 

वृद्धि एवं विकास की गति की दर एक सी नहीं रहती । • विकास की प्रक्रिया एकीकरण के सिद्धांत का पालन करती है। वृद्धि और विकास की क्रिया वंशानुक्रम और वातावरण का संयुक्त परिणाम है।




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