लक्ष्य तथा उद्देश्य में अन्तर ctet 2022
किसी भी कार्य को सुचारू रूप से करने के लिये आवश्यक है कि उसके उद्देश्य व लक्ष्य निर्धारित किए जाए उद्देश्य क्रिया को निश्चित दिशा प्रदान करते हैं। शिक्षण विधियां और पाठ्यक्रम शिक्षा के उद्देश्यों पर निर्भर करते हैं। उद्देश्य निश्चित करके कार्य को आरम्भ किया जाता है। संसार मे जितनी भी क्रियाएं होती है वे किसी लक्ष्य की और उन्मुख होती हैं। जब कोई भी व्यक्ति किसी कार्य को करता है तो वह सोचकर करता हैं कि इसका अन्त भी है। इसलिये कोई भी क्रिया लक्ष्यविहीन नहीं की जा सकती। वैज्ले ने ठीक ही कहा हैं, "उद्देश्यों के ज्ञान के बिना अध्यापक उस नाविक के समान है। जिसे अपने लक्ष्य का ज्ञान नहीं है तथा छात्रा उस पतवार विहीन नौका के समान है जो समुद्र की लहरों में थपेड़े खाती तट की ओर बह रही है।" क्या पढ़ाएं पाठ्यक्रम में आता है, कैसे पढ़ाएं शिक्षण विधियों की जानकारी से सम्बन्धित है तथा क्यों पढ़ाए शिक्षा के उद्देश्य निर्धारित करते हैं।
लक्ष्य तथा उद्देश्यों में अंतर (Difference between Aims and objectives)
उद्देश्य इच्छित लक्ष्य होते हैं, जबकि निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार शिक्षा देने के कारण प्राप्त होने वाले परिणाम है। उद्देश्य आदर्शवादी है, जबकि लक्ष्य व्यावहारिक है। लक्ष्य का अर्थ स्पष्ट करने के लिये कार्टर, बी० गुड ने लिखा है लक्ष्य पूर्व निर्धारित साक्ष्य होता है जो किसी कार्य या क्रिया का मागदर्शन करता है। उद्देश्य में दूरदर्शिता होती है. साथ ही इसमें आदर्शवादिता होती है। जब हम किसी उद्देश्य या लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कार्य करते हैं तो उसके लिए हमें जिन छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखना पड़ता है उन्हें उस उद्देश्य के प्राप्य उद्देश्य कहते है। प्राप्य उद्देश्य वह मानदण्ड या लक्ष्य है जिसको छात्र द्वारा विद्यालय क्रिया को पूर्ण करके प्राप्त किया जाता है। इसके अर्थ को और अधिक स्पष्ट करते हुए गुड ने आगे लिखा है, "प्राप्य उद्देश्य छात्र के व्यवहार में वह इच्छित परिवर्तन है जो विद्यालय द्वारा पथप्रदर्शित अनुभव का परिणाम होता है। इस प्रकार प्राप्य उद्देश्य में व्यावहारिकता अधिक होती है।
लक्ष्य तथा उद्देश्य में निम्न अन्तर है
लक्ष्य
1 क्ष्य का क्षेत्र व्यापक होता है।
2लक्ष्य एक सामान्य कथन है।
3.लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सम्पूर्ण
विद्यालय कार्यक्रम समाज राष्ट्र उत्तरदायी होता है।
लक्ष्य में आदर्शवादिता होती है।
4.अतः इसे पूर्ण रूप में प्राप्त करना संभव नहीं है।
इसकी प्राप्ति हो भी सकती है।
5.लक्ष्य की प्राप्ति में अधिक समय लगता है।
6.ये अविविष्ट होता है.
7.यह कक्षा-कक्ष की शिक्षण रणनीति
को निर्धारित करने में सहायक नहीं है।
8 यह सीखने वालों को स्पष्ट शिक्षा-निर्देश
प्रदान नहीं करते हैं।
उद्देश्य
1उद्देश्य का क्षेत्र सीमित होता है।
2. उद्देश्य एक निश्चित कथन है।
3. उद्देश्य लक्ष्य या उद्देश्य की
छोटी-छोटी शाखाएं होती है।
जत इनकी प्राप्ति का दायित्व
शिक्षक तथा पाठ विशेष की विषयवस्तु
पर होता है।
4.उद्देश्यों की प्राप्ति सम्भव है क्योंकि इसमें व्यवहारिकता होती है। दूसरे शब्दों में प्राप्य उद्देश्य प्राप्यनीय है। उद्देश्य की प्राप्ति में अधिक समय नहीं
5.उद्देश्य की प्राप्ति में अधिक समय नहीं लगता है।
6.ये विशिष्ट होते हैं।
7.ये कक्षा-कक्ष की शिक्षण रणनीति को निर्मितये विशिष्ट होते हैं।
करने में सहायता प्रदान करते हैं।
8.ये सीखने वालों या छात्रों को निश्चित एवं स्पष्ट निर्देश प्रदान करते हैं।
लक्ष्यों एवं उद्देश्यों का महत्व (Importance of Aims and Objectives) उद्देश्यों का होना नितान्त आवश्यक है जिसके निम्न कारण हैं:
लक्ष्य व उद्देश्य शिक्षा के कुशल प्रशासन तथा प्रबन्धन में मदद करते हैं अध्यापक का मार्गदर्शन करते है तथा विद्यार्थी को पढ़ने के लिये प्ररेणा प्रदान करते हैं। मानव जीवन के प्रत्येक पक्ष तथा दैनिक जीवन की प्रत्येक क्रिया की सफलता के लिये
उद्देश्यों का होना नितान्त आवश्यक है जिसके निम्न कारण हैं:
1. उद्देश्य मार्गदर्शक हैं, यह अध्यापक को रास्ते से भटकने नहीं देते।
2. यह पाठ्यक्रम के आधार पर शिक्षण विधियों के चयन में सहायक होते हैं।
3. शिक्षण में प्रयुक्त सहायक सामग्री एवं साधनों के चयन में सहायक है।
4. यह विद्यार्थी को कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करते हैं और मन से उसे दृढ़ निश्चयी बनाते हैं।
5. यह शिक्षा के मूल्यांकन में भी सहायक सिद्ध होते हैं।