क्या है सुख

                           क्या है सुख ? 

नहीं साहब! सुख उसे कहते हैं, जो आराम से बैठा रहता है। उसे कोई काम नहीं करना पड़ता। उसके  पास कोई मुसीबत नहीं आती। उसको कोई गाली नहीं देता। तो आप  इसी को सुख कहता है ? ऐसा सुख तो तब मिल सकता है, जब आप  कहना मानेगा। तब तेरी सारी आवश्यकताएँ पूरी हो जाएँगी, मनोकामनाएँ  पूरी हो जाएँगी। तुझे कोई गाली नहीं देगा। तुझ पर कोई  मुसीबत भी नहीं आएगी। कोई मुकदमा भी नहीं चलेगा। सब मुसीबतें दूर हो जाएँगी। तो एक काम कर, मेरा एक कहना मान ले।  अच्छा, तो ऐसा करो की अफीम का एक गोला खा जा। जिस दिन तू मर जाएगा, उस दिन तुझे पूर्ण शांति मिल जाएगी। फिर तुझे कोई गाली नहीं देगा। यह तो और बड़ी मुसीबत है। यह मुसीबत नहीं है। जब तक आपको जिंदा रहना है, तब तक  संघर्ष करना पड़ेगा। आपको लड़ना पड़ेगा। बहादुरी के साथ हर चीज से टक्कर लेनी पड़ेगी। टक्कर  लेने के साथ में जो आनंद आता है, जो खुशी हासिल होती है, उस चीज का नाम सुख है और कोई सुख समूह नहीं है
सुख उस चीज का नाम है, जिसमें आदमी श्रेष्ठ सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाता हुआ चलता । बस, उस चीज का नाम सुख । इसको हम शांति कह सकते हैं, संतोष कह सकते हैं। संतोष का नाम सुख है। जब आदमी यह समझता है कि हमने अपनी इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर ली। विजयश्री की माला पहनते हुए जब आदमी गर्व से सिर ऊँचा उठाता है कि हमने विजय प्राप्त कर ली। किसके ऊपर? जो हमारे सबसे बड़े वाले बैरी थे, उनको हमने परास्त कर दिया। विजयादशमी सबसे बड़ा खुशी का दिन माना जाता है। इसी दिन राम ने रावण के ऊपर विजय प्राप्त की थी। रामचंद्र जी के जमाने में इसे खुशी के दिन के रूप में मनाया गया था। विजयादशमी का पर्व हम भी मनाते हैं, क्योंकि रावण पर विजय प्राप्त की गई थी।
जिस दिन आप इंद्रियों के ऊपर विजय प्राप्त करते हैं, मानसिक असंतुलन के ऊपर विजय प्राप्त करते हैं। जिस दिन आप तृष्णाओं के ऊपर विजय प्राप्त करते हैं, जिस दिन आप अपनी वासनाओं के ऊपर विजय प्राप्त करते हैं, उस दिन आप विजयी हो जाते हैं। उस दिन आप विजयश्री के अधिकारी हो जाते हैं। उस दिन आपको जो संतोष मिलेगा, वह कितना शानदार हो सकता है, इसे हम कैसे बता सकते हैं। जबकि आप वस्तुओं के माध्यम से यह ख्याल लगाए बैठे हैं कि वस्तुएँ अगर हमको मिल जाएँगी, तो हमारा काम बन जाएगा। आपके पास से ज्यादा वस्तुएँ जिनके पास हैं, मैं उनके नाम आपको बता सकता हूँ । आप उनके पास जाइए और यह तलाश करके आइए कि आपकी इच्छानुकूल जो वस्तुएँ मिली हुई हैं, उनसे आपको कोई शिकायत तो नहीं है ? उत्तर पाकर आप आश्चर्यचकित रह जाएँगे
हेनरी फोर्ड का नाम आपने सुना होगा। उसकी फैक्टरी में एक सेकंड में एक मोटर बनकर तैयार होती थी। हर सेकंड एक मोटर तैयार होकर निकलती थी। हेनरी फोर्ड दुनिया का सबसे बड़ा मालदार आदमी था। उसने अपनी डायरी में लिखा है- "हे भगवान! अगर मेरी मौत हो तो मुझे अमेरिका में जन्म मिले। हे भगवान! अगर मुझे इसी फैक्टरी में जन्म मिले, तो हेनरी फोर्ड होने के बजाय मजदूर होने का मौका देना, ताकि मैं मशक्कत के द्वारा, अपने हाथ-पाँव की कमाई के द्वारा, खूब मेहनत करूँगा और गहरी नींद में सो सकूँगा और मुझे शांति के साथ दिन व्यतीत करने का मौका मिलेगा।"  इतने मालदार आदमी ने ऐसी प्रार्थना क्यों की? क्योंकि जिस सुख को आप तलाश करते हैं, उसके बारे में आप यह विचार बदल दें कि वस्तुओं के माध्यम से हमको सुख मिलता है, जैसा कि आपका ख्याल है कि अमुक अमुक चीज हमें दे दीजिए, हमें सुख मिलेगा। चलिए मैं आपको देने के लिए तैयार हूँ, फिर आप यह बताना कि आपको सुख मिला है। इनसे आपको सुख नहीं मिलेगा।


सही दृष्टिकोण का नाम है सुख 

 सुख एक मानसिक स्थिति का नाम है। सुख एक दृष्टिकोण का नाम है। सुख एक सोचने के तरीके का नाम है। सुख वस्तुओं के साथ जुड़ा हुआ नहीं है, जैसा कि आप लोग समझते हैं। जिस अध्यात्मवाद का हम प्रशिक्षण करते हैं, उसी में समस्त समस्याओं का हल छिपा हुआ है। हमारे दिमाग पर छाई हुई लाखों करोड़ों समस्याओं का हल अध्यात्मवाद में सन्निहित है। इसलिए आप अपने ट्रांजिस्टर की सुई को बदल दीजिए। आप अपनी धुरी को बदल दीजिए, फिर देखिए कि आप कितने खुशहाल हैं। आप कितना प्रसन्न जीवनयापन कर रहे हैं। आप कितने खुशहाल हैं। चाणक्य के  पास कपड़े नहीं थे। उनके पास बरतन नहीं थे। उनके पास खाने को नहीं था। उनके पास जायदाद नहीं थी उनके पास मकान नहीं था। वे झोंपड़ी में रहते थे, फिर भी सब लोग उनके पास शांति और समाधान पाने के लिए जाते थे। खुशहाली पाने के लिए जाते थे और उनके चरणों को छूते थे।

चाणक्य के पास संपत्ति थी ? गांधी जी के पास संपत्ति थी? बुद्ध के पास संपत्ति थी ? नहीं थी। फिर आपने यह क्या संपत्ति-संपत्ति लगा रखी है। संपत्ति से आपके जीवन के सुख का कोई ताल्लुक नहीं है। इसलिए मैं कहता हूँ कि अगर आपको सुख की तलाश है, तो वस्तुओं के बारे में ख्याल करना बदल दें और यह मानकर चलें कि जो भी वस्तुएँ हमारे पास हैं, उनका हम सही उपयोग कर सकते हैं। तब छोटी-सी-छोटी चीज, ! घटिया-से-घटिया चीज आपके लिए फायदेमंद हो सकती हैं। मैं तो आपसे यह भी कह सकता हूँ कि घटिया चीजें ही आपके लिए उपयोगी हो सकती हैं। मान लीजिए आपका बेटा कपूत है और आपका कहना नहीं मानता, क तो आप उससे भी लाभ उठा सकते हैं। अगर आपका बेटा कपूत रहा होता, तो आपको पेंशन के जो तीन सौ पचास रुपये महीने में मिलते हैं, उनको भी हड़प कर जाता और कहता कि पेंशन तो हमें दे जाइए। भतीजा कहता कि ताऊ जी ! इस बच्चे को गोद में खिलाकर लाइए। वह सारे दिन बच्चे की टट्टी साफ करवाता, और बेटे की बहू सारे • दिन हुक्म चलाती। ताऊ जी ! जाना, जरा शाक-सब्जी खरीदकर लाना। बेटे! जितना काम लिया जाना है, • उतना लिया जाता। अब आपका बेटा है कपूत और कपूत बेटे की बहू है और वह भी अड़ियल स्वभाव की। आपका धन्यवाद है। क्यों, क्या हो गया ? सारे दिन बक-झक करना पड़ता है। अब हम यहाँ नहीं रहेंगे। तो कहाँ जाएँगे? साहब! हम तो शांति प्राप्त करने जाएँगे। हम शांतिकुंज जाएँगे । हाँ बेटे! तू हमारे यहाँ शांतिकुंज में रह । तुझे साढ़े तीन सौ रुपया महीना पेंशन मिलती है। पैंसठ रुपये महीने खाने के जमा कर दे और बाकी जो बचता है, उसमें हम भी खाएंगे और तू भी खाएगा। ढाई सौ रुपये तू में मौज करेंगे। अरे महाराज जी साढ़े तीन सौ रुपये तो घर वालों को देने पड़ते हैं। अरे, आग लगा इनको। किनको ? जिनके लिए तू मर रहा था। इनसे आप एक नया दृष्टिकोण नहीं ले सकते हैं? अगर वे कपूत हैं. तो आप उनसे दूसरे फायदे उठा सकते हैं। जहर में से भी अमृत निकाला जा सकता है। जो आदमी दवाइयाँ बनाने वाले होते हैं, वे जहर में से भी अमृत निकाल लेते हैं। विपरीत और उलटी परिस्थितियों में भी अगर आपको सोचने का तरीका आता हो, तो उसमें से भी निष्कर्ष निकाला जा सकता है। आप उसमें से भी दिशाएँ प्राप्त कर सकते हैं और वह प्रकाश प्राप्त कर सकते हैं, जो आपके जीवन के लिए कल्याणकार साबित हो सकता है।
चाणक्य के पास संपत्ति थी ? गांधी जी के पास संपत्ति थी? बुद्ध के पास संपत्ति थी ? नहीं थी। फिर आपने यह क्या संपत्ति-संपत्ति लगा रखी है। संपत्ति से आपके जीवन के सुख का कोई ताल्लुक नहीं है। इसलिए मैं कहता हूँ कि अगर आपको सुख की तलाश है, तो वस्तुओं के बारे में ख्याल करना बदल दें और यह मानकर चलें कि जो भी वस्तुएँ हमारे पास हैं, उनका हम सही उपयोग कर सकते हैं। तब छोटी-सी-छोटी चीज, ! घटिया-से-घटिया चीज आपके लिए फायदेमंद हो सकती हैं। मैं तो आपसे यह भी कह सकता हूँ कि घटिया चीजें ही आपके लिए उपयोगी हो सकती हैं। मान लीजिए आपका बेटा कपूत है और आपका कहना नहीं मानता, क तो आप उससे भी लाभ उठा सकते हैं। अगर आपका बेटा कपूत रहा होता, तो आपको पेंशन के जो तीन सौ पचास रुपये महीने में मिलते हैं, उनको भी हड़प कर जाता और कहता कि पेंशन तो हमें दे जाइए। भतीजा कहता कि ताऊ जी ! इस बच्चे को गोद में खिलाकर लाइए। वह सारे दिन बच्चे की टट्टी साफ करवाता, और बेटे की बहू सारे दिन हुक्म चलाती। ताऊ जी ! जाना, जरा शाक-सब्जी खरीदकर लाना। बेटे! जितना काम लिया जाना है,  उतना लिया जाता। अब आपका बेटा है कपूत और कपूत बेटे की बहू है और वह भी अड़ियल स्वभाव की। आपका धन्यवाद है। क्यों, क्या हो गया ? सारे दिन बक-झक करना पड़ता है। अब हम यहाँ नहीं रहेंगे। तो कहाँ जाएँगे? साहब! हम तो शांति प्राप्त करने जाएँगे। हम शांतिकुंज जाएँगे । हाँ बेटे! तू हमारे यहाँ शांतिकुंज में रह । तुझे साढ़े तीन सौ रुपया महीना पेंशन मिलती है। पैंसठ रुपये महीने खाने के जमा कर दे और बाकी जो बचता है, उसमें हम भी खाएंगे और तू भी खाएगा। ढाई सौ रुपये तू में मौज करेंगे। अरे महाराज जी साढ़े तीन सौ रुपये तो घर वालों को देने पड़ते हैं। अरे, आग लगा इनको। किनको ? जिनके लिए तू मर रहा था। इनसे आप एक नया दृष्टिकोण नहीं ले सकते हैं? अगर वे कपूत हैं. तो आप उनसे दूसरे फायदे उठा सकते हैं। जहर में से भी अमृत निकाला जा सकता है। जो आदमी दवाइयाँ बनाने वाले होते हैं, वे जहर में से भी अमृत निकाल लेते हैं। विपरीत और उलटी परिस्थितियों में भी अगर आपको सोचने का तरीका आता हो, तो उसमें से भी निष्कर्ष निकाला जा सकता है। आप उसमें से भी दिशाएँ प्राप्त कर सकते हैं और वह प्रकाश प्राप्त कर सकते हैं, जो आपके जीवन के लिए कल्याणकार साबित हो सकता है।





एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने