बक्सर कि कहानी बहुत पुरानी है। इसकी जानकारी त्रेता युग से ही मिलता है जिस समय भगवान राम जी का जन्म हुआ था उस समय बक्सर का नाम व्यागसर के नाम से जाना जाता था इसके अलावा बक्सर को विश्वामित्र की नगरी के नाम से भी जाना जाता था। बक्सर की पहचान धार्मिक युग से ही आती है। बक्सर गंगा के किनारे बसा एक छोटा सा शहर है।
बक्सर का नाम बक्सर क्यों पड़ा :
प्राचीन काल में बक्सर का नाम व्यागासर के नाम जाना जाता था। क्योकी यहां पर बाघो का झुंड रहा करता था जो आधुनिक काल में कोवलदा के नाम से जाना जाता है यहा पर ही हजारों के झुंड में पानी पीने के लिए आते थे। बाघों के नाम पर ही इसे व्याघसर कहा गया लेकिन समय के साथ इसका नाम आधुनिक युग में व्यागसर से बक्सर पड़ गया।
बक्सर कि कहानी त्रेता युग जुड़ना :
बक्सर में त्रेता युग में महर्षि विश्वामित्र यहां रहा करते थे जो यहां पर रह कर यज्ञ करते थे जो आधुनिक समय में चरित्रवन के नाम से जाना जाता है त्रेता युग में इसी वन में तड़का नामक राक्षसी रहती थी जब विश्वामित्र यज्ञ किया करते थे तो उनका यज्ञ भंग कर देती थी। तो उस समय ही विश्वामित्र ने भगवान राम जी को बक्सर में लेकर आय थे और राक्षसी ताड़का का वध कराया जो आज के समय में बक्सर में ताड़का नाला के नाम से प्रसिद्ध है। जब राम जी ताड़का को मारने आए थे तो भगवान राम जी गंगा के किनारे स्नान किया जिसे आज हमलोग रामरेखा घाट के नाम से जानते है। उसी स्थान पर भगवान राम जी पैर का निशान प्रपात हुआ जो आज भी रामरेखा घाट के मंदिरों पर रखा गया हैं
बक्सर में घूमने वाला स्थान :
बक्सर में बहुत ही सुन्दर- सुन्दर भ्रमण करने वाला स्थान है। राम रेखा घाट से कुछ दूर पर ही ऐतिहासिक एक किला का मैदान है अग्रेजो के द्वारा बनाया गया था। यह मैदान गंगा के डीक किनारे बसा हैं जो गंगा किनारे से काफी ऊंचाई पर है यह मैदान बाढ के समय बक्सर शहर को सुरछा प्रदान करता है जिसे बक्सर का प्रहरी कहा जाता है। इसी मैदान में दशहरा के समय बहुत बड़ा मेला लगता है इस मेला में दशहरा के शुभ अवसर पर रावण ,मेगनाथ का पुतला दहन किया जाता है इसके कुछ आगे जाने पर नाथबाबा का मंदिर बना है जो बहुत ही सुंदर मन्दिर है जो टिक गंगा नदी के बगल में है इसके आगे एक और मंदिर है जिसे नवलखा मन्दिर के नाम से जानते है इसी मंदिर में शीश महल है जो एक आकर्षक का केंद्र है वहा से घूमने के बाद 1 km के दूरी पर ही रेलवे स्टेशन है रेलवे स्टेशन से 5kn पर कोवथक्वली का मैदान है जहा पर बक्सर के युद्ध 1764 में लड़ा गया था
बक्सर का त्यौहार मुख्य रूप से :
बक्सर में मुख्य रूप से त्योहार होली , दशहरा, दीपावली और छठ है। लेकिन यहां के लोग मुख्य रूप से छठ और दशहरा को धूमधाम से मनाते है गंगा नदी के किनारे बसे होने कारण छठ पूजा बड़ी ही धूमधाम से किया जाता है जो देखने योग्य होता है
बक्सर का खानपान :
बक्सर में हर तरह के वेंजन प्रपात होता है लेकिन यहां के लोग मुख्य रूप से लिटि- चोखा खाना पसंद करते है ।
लिटि - चोखा के पीछे भी एक कहानी है की यहां पर लिटि - चोखा खाना पसंद क्यों करते है बक्सर में पचकोस नाम का एक पर्व मनाया जाता हैं
जहा पांच गांव घूमना पड़ता है और हर गांव में अलग जलग खान पान बनता है जो अंतिम रूप से जहां भगवान राम आय थे जिसे चरित्रवन के नाम से जानते है वही पर लिटि और चोखा बक्सर के लोग बना कर खाते है उसी समय से लोगो को यहां लिटि और चोखा पसंद जो आज पूरे बिहार में यह पसन्द से खाते है
मिटाई में याह के लोग बेसन का बना पापड़ी खाना पसंद करते है जो था का फेमश मिठाई में आता है।
बक्सर का बाजार : बक्सर का बाजार कोई खास बड़ा नही है
मुख रूप कुछ स्थान के नाम है
* रामरेखाघाट , ठठेरी बाजार, मुनीब चौक, गोला बाजार, है
* सिनेमा हैल दुर्गा टॉकीज (बड़की बाजार के पास)
*मंदिर– गोरी शंकर मंदिर( सोहनी पट्टी बक्सर) काली मन्दिर (सोहनी पट्टी बेपास) बावन भगवान (सेंटल जेल )
*घूमने वाला स्थान नगर भवन
Buxar ka hotal :
वेश्नवी क्लार्क इन ( सोहनी पट्टी बेपाश के पास)
* अंबेसडर होटल ( गोलंबर के पास)
* बक्सर होटल (किला मैदान के पास)
* M V COLLEGE BUXAR (चरित्रवन)
*P C COLLEGE( इटारी रोड़ बक्सर)
बक्सर जिला:
बक्सर में कुल 11 ब्लॉक है
थाना– बक्सर
नया कचरी चीनी मिल के पास स्थित है यहां से रेलवे स्टेशन मात्र 500 मीटर के दूरी पर है
बक्सर का पोस्ट ऑफिस गोला बाजार के पास है।
बक्सर का सदर हॉस्पिटल सेंटेल जेल के पास है।
बक्सर का थाना पुलिस चौकी किला मैदान के पास स्थित है।
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