बिहार के जो शिक्षक भविष्य बना सकते है आज उनका भविष्य अंधेर में क्यों...

 बिहार के जो शिक्षक भविष्य बना सकते है आज उनका भविष्य अंधेर में क्यों...

मिकु पाल, नीतीश पाण्डेय, अनीश सिंह, जैसे बहुत से छात्र आज सेंट्रल टीचर एलिजिबलिटी टेस्ट (CTET) पास होकर भी  अपनी मंजिल पाना कठिन हो गया है।


मेरा भी मन कभी कुछ करने और करने को करता है। लेकिन अपने साथी सब को देख कर हौसला मिल जाता है। आज बिहार की वह हालत है जहा शिक्षक और शिक्षा सड़क का वह किनारा हो गया है जहा पर लोग चलते– फिरते खाते– पीते है लेकिन ध्यान देने वाला कोई नही हैं।
नोवजवानो को बिहार में नौकरी पाना अब तो सही में भगवान से मिलने के बराबर होगया है  अब तो लगता है की जिंदगी और समय दोनो हाथ से निकल रहा है लेकिन ये किसी को समझ में नही आरहा है।

जिंदगी से खुद लड़ना पर रहा है और समय से समाज की ताना से लड़ना पर रहा हैं.......
बिहार में तो अब एक ट्रेंड निकला है की bed,de.led और ctet करने के बाद आंदोलन एक नया exam बिहार में देना पड़ता है। और इस भी nhi होता है तो पुलिस वाले का लाठी डंडा खाना पड़ता है। 

बिहार में शिक्षा सुधरे या ना सुधरे लेकिन वहा के शिक्षक बनने वाले छात्र–छात्रा सुधर जाना है की हमने bed deled क्यों किया जो किसी काम नही रहा
                    आज तो शिक्षा और शिक्षक हमारे बिहार राज्य में राजनीति हो गया है जो election के समय ही शिक्षा और शिक्षक याद आते है ऐसे तो नेता जी को स्कूल क्या होता है याद नही आता है
लेकिन जो शिक्षक 3साल से अपना समय केवल शिक्षक बनने में दे दिए है उनका किया होगा वह तो बिहार के शिक्षा को सुधारने में लगे हुवे है लेकिन लगता है  की बिहार के शिक्षको का ही जीवन अंधेर में है। 
वैसे अगर ये शिक्षक बहाल भी हुए तो वैसे शिक्षक होंगे जिन्हें बिहार में 'दोयम दर्जे' का टीचर माना जाता है. उन्हें पुराने सरकारी टीचरों (2000 के पहले वालों) के मुक़ाबले वेतन कम होगा. कई सुविधाएं नहीं मिलेंगी, जिसके लिए शायद फिर संघर्ष करना पड़े, जैसे उनके पहले इसी श्रेणी में बहाल हो चुके ।

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