रात भले कितनी लंबी हो फिर आएगी एक सुबह,
मंजिल से भटके राही को है राह मिलेगी एक सुबह ।
खग मृग की संगति में सारी सृष्टि कुलांचे भरती है,
सकुचाई कलियों के लब पे फिर लाली होगी एक सुबह।
करते रहो प्रयास अनवरत प्रति पल बढ़ते जाओ तुम,
कितनी भी आए बाधाएं मंजिल पाओगे एक सुबह ।
जीवन-वाणी के तारों में ले नाद रूप जाओ तुम,
संस्पर्श समय का पाकर के भैरवी बजेगी एक सुबह ।
मेंहदी से घिसते जाओ तुम भट्टी में गलते जाओ तुम,
गौरव गंध मिलेगी तुमको कंदन-सी गरिमा एक सुबह ।
जीवन सरिता की लहरों में पत्थर बन बहते जाओ तुम,
प्रेमी धारा में घिस घिसकर तुम होगे शंकर एक सुबह
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