हिन्दी गजल
अगर वो न मुझको गले से लगाता ।
किसे दुःख भरा गीत अपना सुनाता ।
मिरे साथ चलने का वादा जो करते
हैं क्या शै वफायें यह मैं भी बताता ।
मिरे दिल में वर्षों से चाहत रही है
मैं जाकर विदेशों में दौलत कमाता ।
महब्बत अगर बर्फ सी बन के गिरती
अग्न दिल की मैं भी सुलगती बुझाता ।
नसीबों में जिसके न रोटी न कपड़ा
वो दर-दर की ठोकर है दुनिया में खाता ।
दिया दिल का रोशन है आ जाइएगा
ये रातों में रस्तों को है जगमगाता ।
मुसीबत में कोई मदद को न आए
बशर हर कोई अपनी नजरें चुराता ।
सिखाई हमें मुश्किलों ने हर इक शै
नहीं हाथ कोई पकड़ कर सिखाता
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