संधि विच्छेद
संधि (Sandhi)
V .V .I for ctet 2022
संधि दो शब्दों से मिलकर बना है सम् धि जिसका अर्थ होता है मिलना। हमारी हिंदी भाषा में संधि के द्वारा पुरे शब्दों को लिखने की परम्परा नहीं है। लेकिन संस्कृत में संधि के संधि (Sandhi) बिना कोई काम नहीं चलता। संस्कृत की व्याकरण की परम्परा बहुत पुरानी है। संस्कृत भाषा को अच्छी तरह जानने के लिए व्याकरण को पढ़ना जरूरी है। शब्द रचना में भी संधियाँ काम करती हैं।
जब दो शब्द मिलते हैं तो पहले शब्द की अंतिम ध्वनि और दूसरे शब्द की पहली ध्वनि आपस में मिलकर जो परिवर्तन लाती हैं उसे संधि कहते हैं। अथार्त संधि किये गये शब्दों को अलग अलग करके पहले की तरह करना ही संधि विच्छेद कहलाता है। अथार्त जब दो शब्द आपस में मिलकर कोई तीसरा शब्द बनती है तब जो परिवर्तन होता है, उसे संधि कहते हैं।
उदहारण:- हिमालय हिम आलय, सत् + आनंद सदानंद ।
संधि के प्रकार (Sandhi Ke Prakar) : संधि तीन प्रकार की होती हैं : 1. स्वर संधि
2. व्यंजन संधि
3. विसर्ग संधि
1. स्वर संधि क्या होती है :-
जब स्वर के साथ स्वर का मेल होता है तब जो परिवर्तन होता है उसे स्वर संधि कहते हैं। हिंदी में स्वरों की संख्या ग्यारह होती है। बाकी के अक्षर व्यंजन होते हैं। जब दो स्वर मिलते हैं जब उससे जो तीसरा स्वर बनता है उसे स्वर संधि कहते हैं। उदहारण: विद्या आलय विद्यालय । स्वर संधि पांच प्रकार की होती हैं :
(1) दीर्घ संधि
(2) गुण संधि
(3) वृद्धि संधि
(4) यण संधि
(5)-अयादि
(1) दीर्घ संधि का होती है :-
जब ( अ, आ ) के साथ ( अ, आ ) हो तो आ बनता है. जब ( . इ. ई ) के साथ ( इ. ई) हो तो ई बनता है, जब ( उ ऊ ) के साथ (उ. ऊ ) हो तो ऊ बनता है। अथार्त सूत्र - अकः सवर्ण दीर्घः मतलब अक प्रत्याहार के बाद अगर सवर्ण हो तो दो मिलकर दीर्घ बनते हैं। दूसरे शब्दों में हम कहें तो जब दो सुजातीय स्वर आस- पास आते हैं। तब जो स्वर बनता है उसे सुजातीय दीर्घ स्वर कहते हैं. इसी को स्वर संधि की दीर्घ संधि कहते हैं। इसे ह्रस्व संधि भी कहते हैं।
उदहारण धर्म +अर्थ =धर्मार्थ
पुस्तक +आलय =पुस्तकालय
विद्या +अर्थी = विद्यार्थी
रवि + इंद्र = रविन्द्र
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गिरी +ईश = गिरीश
मुनि + ईश= मुनीश
भानु +उदय भानूदय
वधू + ऊर्जा वधूर्जा
विधु + उदय = विधूदय
भू+ उर्जित भुर्जित ।
2. गुण संधि क्या होती है :-
जब ( अ, आ ) के साथ ( इ. ई) हो तो ए बनता है, जब (अ. आ ) के साथ ( उ ऊ ) हो तो ओ बनता है, जब ( अ, आ ) के साथ (ऋ) हो तो अर बनता है उसे गुण संधि कहते हैं।
उदहारण:
नर +इंद्र =नरेंद्र
सुर +इन्द्र =सुरेन्द्र
ज्ञान + उपदेश =ज्ञानोपदेश VVI for ctet
भारत + इंदु =भारतेन्दु
देव +ऋषि =देवर्षि
सर्व +ईक्षण =सर्वेक्षण
3. वृद्धि संधि क्या होती है :-
जब ( अ, आ ) के साथ (ए. ऐ) हो तो ऐ बनता है और जब ( अ, आ ) के साथ ( ओ, औ ) हो तो औ बनता है। उसे वृधि संधि कहते हैं। . उदहारण:
मत+एकता = मतैकता
एक +एक एकैक
धन +एषणा =धनैषणा .
सदा +एव =सदैव
महा +ओज =महौज।
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4. यण संधि क्या होती है :-
जब ( इ. ई) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो य बन जाता है, जब ( उ ऊ ) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो व् बन जाता है. जब (ऋ) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो 'र' बन जाता है।
यण संधि के तीन प्रकार के संधि युक्त पद होते हैं।
(1) य से पूर्व आधा व्यंजन होना चाहिए।
(2) व् से पूर्व आधा व्यंजन होना चाहिए।
(3) शब्द में त्र होना चाहिए।
यण स्वर संधि में एक शर्त भी दी गयी है कि य और त्र में स्वर होना चाहिए और उसी से बने हुए शुद्ध व सार्थक स्वर को + के बाद लिखें। उसे यण संधि कहते हैं।
उदहारण: .
इति + आदि =इत्यादि
परी आवरण= पर्यावरण
अनु अय= अन्वय।
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सु+ आगत =स्वागत
अभी +आगत =अभ्यागत
5. अयादि संधि
जब ( ए ऐ ओ औ) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ए अय में ऐ आय में ओ अव में औ आव हो जाता है।
य व से पहले व्यंजन पर अ. आ की मात्रा हो तो अयादि संधि हो सकती है लेकिन अगर और कोई विच्छेद न निकलता हो तो + के बाद वाले भाग को वैसा का वैसा लिखना होगा। उसे अयादि संधि कहते हैं।
उधारण
. ने +अन =नयन
नौ +इक =नाविक
भो + अन=भवन
पो+ इत्र पवित्र
2. व्यंजन संधि क्या होती है :-
जब व्यंजन को व्यंजन या स्वर के साथ मिलाने से जो परिवर्तन होता है, उसे व्यंजन संधि कहते हैं।
उदहारण: .
दिक् + अम्बर = दिगम्बर
अभी +सेक =अभिषेक
व्यंजन संधि के 13 नियम होते हैं :
(1) जब किसी वर्ग के पहले वर्ण कु. चू. टू. त्. प. का मिलन किसी वर्ग के तीसरे या चौथे वर्ण से याय, र, ल, व, ह से या किसी स्वर से हो जाये तो क को ग् च को ज् टु को इ. तू को द . और प् को ब में बदल दिया जाता है अगर स्वर मिलता है तो जो स्वर की मात्रा होगी वो हलन्त वर्ण में लग जाएगी लेकिन अगर व्यंजन का मिलन होता है तो वे हलन्त ही रहेंगे।
उदहारण के के ग् में बदलने के उदहारण
दिक् + अम्बर = दिगम्बर .
दिक् +गज =दिग्गज
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वाक् + ईश = वागीश
च् के ज् में बदलने के उदहारण:
अच् + अन्त = अजन्त
अच् + आदि =अजादी
टू के ड् में बदलन के उदहारण:
षट् + आनन = षडानन
षट् + यन्त्र =षड्यन्त्र
षट्+ विकार =षड्विकार
षट् + अंग = षडंग
तू के द में बदलने के उदहारण:
तत् + उपरान्त तदुपरान्त
सदाशय= सत् + आशय
तत् +अनन्तर = तदनन्तर
घाटन +जगदम्बा = उद्घाटनउत्
जगत् + अम्बा = जगदम्बा
प के व् में बदलने के उदहारण:
अप्+ द = अब्द
अप् + ज = अब्ज
(2) यदि किसी वर्ग के पहले वर्ण (कु. च. टू. तू. प) का मिलन न या म वर्ण ( ङ. ञज, ण, न, म ) के साथ हो तो क को इ. च् को ज्. टु को ण. तु को न तथा प् को म में बदल दिया जाता है।
उदहारण:- कृ के ङ् में बदलने के उदहारण:
वाक् +मय = वाङ्मय
दिक् मण्डल = दिङ्गण्डल
प्राक्+ मुख = प्राङ्मुख
द के ण में बदलने के उदहारण:
षट् + मास = षण्मास
षट् + मूर्ति = षण्मूर्ति
षट्+ मुख = षण्मुख
तू के न में बदलने के उदहारण:
उत् +नति= उन्नति
जगत् + नाथ = जगन्नाथ
उत् + मूलन = उन्मूलन
प् को म में बदलने के उदहारण:
अप् + मय =अम्मय
(3) जब त् का मिलन ग, घ, द, ध, ब, भ, य, र, व से या किसी स्वर से हो तो दू बन जाता है। म के साथ क से म तक के किसी भी वर्ण के मिलन परम की जगह पर मिलन वाले वर्ण का अंतिम नासिक वर्ण बन जायेगा।
उदहारण : म् + क ख ग घ ङ के
उदहारण: . =
सम् + कल्प = संकल्प
सम् + ख्या = संख्या
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सम् + गम = संगम
शम् + कर = शंकर
सम् + कल्प संकल्प = सटङ्कल्प
म् + च, छ, ज, झ, ञ के उदहारण:
सम् + चय = संचय
किम्+ चित् = किंचित
सम् + जीवन = संजीवन
म्+ ट, ठ, ड, ढ, ण के उदहारण:
दम् + ड = दण्ड / दंड
खम् + ड = खण्ड / खंड
म् त, थ, द, ध, न के उदहारण:
सम्+ तोष सन्तोष / संतोष
किम्+ नर = किन्नर
सम् + देह = सन्देह
म्+ प, फ, ब, भ, म के उदहारण:
सम्+ पूर्ण = सम्पूर्ण / संपूर्ण
सम् +भव = सम्भव / संभव
त्+ग, घ, ध, द, ब, भ, य, र, व् के उदहारण:
=सत् + भावना =सद्भावना
जगत् + ईश = जगदीश
भगवत् +भक्ति + भगवद्भक्ति
तत् + रूप =तद्रूपत
सत् + धर्म = सद्धर्म
सत् +जन = सज्जन
जगत् + जीवन = जगज्जीवन
वृहत् + झंकार = वृहज्झंकार
त्+ह के उदहारण:
उत् + हार = उद्धार .
उत् + हरण = उद्धरण .
तत् + हित = तद्धित
(7) स्वर के बाद अगर छ वर्ण आ जाए तो छू से पहले च वर्ण बढ़ा दिया जाता है। तु या द् के साथ या ठ का मिलन होने पर त् या दु की जगह पर टू बन जाता है। जब त्या द् के साथ ड या ढ की मिलन होने पर त् या द् की जगह पर बन जाता है।
उदहारण:
तत् + टीका = तट्टीका
वृहत + टीका =वृहट्टीका .
भवत् + डमरू = भवड्डमरू
अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, + छ के उदहारण:
स्व +छंद = स्वच्छंद
आ +छादन =आच्छादन
संधि + छेद = संधिच्छेद
अनु+छेद=अनुच्छेद
(8) अगर म के बाद क से लेकर मु तक कोई व्यंजन हो तो म् अनुस्वार में बदल जाता है। तु या द के साथ जब ल का मिलन होता है तब तु या द् की जगह पर 'ल' बन जाता है।
उदहारण:
उत् + लास =उल्लास
तत् + लीन =तल्लीन
विदयुत + लेखा = विपुल्तेखा
म्+च्. क. त. ब. प के उदहारण:
. किम्+ चित =किंचित .
किम् + कर = किंकर
सम् +कल्प = संकल्प
सम् + चय = संचयम
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सम+तोष = संतोष
सम् + बंध = संबंध
(9) म् के बाद म का द्वित्व हो जाता है त्या द् के साथ ह के मिलन पर त् या द् की जगह पर द तथा ह की जगह पर ध बन जाता है।
उदहारण:
उत् + हार = उद्धार / उद्धार
उत् + हृत = उद्धृत/उधृत
पढ़ + हति = पद्धति
म्+ म के उदहारण:
सम् + मति =सम्मति
सम् + मान = सम्मान
(10) म के बाद य्. र्, ल्. व्. शु. ष. स. ह में से कोई व्यंजन आने पर म् का अनुस्वार हो जाता है। तू या दु' के साथ 'श' के मिलन पर तु या दु की जगह पर 'च्' तथा श' की जगह पर छ बन जाता है।
उदहारण:
उत् + श्वास = उच्चास .
उत् +श्रृंखल =उच्छृंखल
शरत् + शशि = शरच्छशि
म्+ य, र, व्. श. ल. स. के उदहारण:
सम् + योग = संयोग
सम्र+ क्षण =संरक्षण
सम्+ विधान संविधान
सम् + शय = संशय
सम् +लग्न= संलग्न
सम् + सार संसार
(11) ऋ. रष से परे न का ण हो जाता है परन्तु चवर्ग, टवर्ग, तवर्ग, श और स का व्यवधान हो जाने पर न का ण नहीं होता। किसी भी स्वर के साथ छ' के मिलन पर स्वर तथा छ' के बीच 'च' आ जाता है।
उदहारण: .
आ + छादन = आच्छादन
अनु + छेद = अनुच्छेद
शाला+ छादन = शालाच्छादन
स्व+छन्द =स्वच्छन्द
र् + न, म के उदहारण:
परि +नाम = परिणाम
प्र + मान = प्रमाण
(12) स् से पहले अ, आ से भिन्न कोई स्वर आ जाए तो स् को ष बना दिया जाता है।
उदहारण:
वि+ सम = विषम
अभि+ सिक्त = अभिषिक्त
अनु + संग = अनुषंग
भू + स् के उदहारण: .
अभि+ सेक = अभिषेक
नि+ सिद्ध = निषिद्ध
वि + सम = विषम
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(13) यदि किसी शब्द में कही भी ऋ र या ष हो एवं उसके साथ मिलने वाले शब्द में कहीं भी 'न' हो तथा उन दोनों के बीच कोई भी स्वर, क, ख ग, घ, प, फ, ब, भ, म, य, र, ल, व में से कोई भी वर्ण हो तो सन्धि होने पर न के स्थान पर ण हो जाता है जब द् के साथ क, ख, त, थ, पं. फ. श, ष, स, ह का मिलन होता है तब द की जगह पर तू बन जाता है।
उदहारण: .
राम + अयन = रामायण
परि +नाम= परिणाम
नार + अयन = नारायण
संसद् + सदस्य = संसत्सदस्य
तद् + पर = तत्पर
सद् + कार = सत्कार
आगे विसर्ग संधि आएगा........................