Ctet 2022 मनोविज्ञान की परिभाषाएं:

 मनोविज्ञान की परिभाषाएं: ctet 2022


मनोविज्ञान का अर्थ "मन के विज्ञान' को मनोविज्ञान कहा जाता है। भारतीय वाङ्मय में उसकी प्रकृति पष्चिम के मनोविज्ञान के समान शैक्षणिक (Educational) नहीं होकर आध्यामिक्क (Spritual) हैं। अतः उसे "मन का ज्ञान कहना अधिक सार्थक प्रतीत होता है। प्राचीन भारत में मनोविज्ञान को आत्मा के विज्ञान और चेतना के विज्ञान के रूप में लिया जाता है। भारतीय मनीषी आध्यात्मिक साधना, जिसमें ध्यान, समाधि और योग भी सम्मिलित था, के द्वारा जो अनुभव एवं अनुभूतियां प्राप्त करते थे उनके आधार पर मनोवैज्ञानिक समस्याओं का समाधान भी तलाषा जाता था। यूं तो पाष्चात्य मनोविज्ञान का उद्भव भी दर्शन से हुआ हैं। मनोवैज्ञानिक मन के अनुसार मनोविज्ञान, व्यवहार और अनुभूति का एक निष्चित विज्ञान है जिसमें व्यवहार को अनुभूति के माध्यम से अभिव्यक्त किया जाता है। मनोविज्ञान की विकास की लम्बी यात्रा के दौरान मनोवैज्ञानिकों एवं मनीषियों ने चिंतन मनन किया तथा मनोविज्ञान के स्वरूप को निर्धारित किया। अनेक मनोवैज्ञानिकों ने मनोविज्ञान को निम्नानुसार परिभाषित किया है। 

1. स्किनर- "मनोविज्ञान व्यवहार और अनुभव का विज्ञान है।"

 2. मन- "आधुनिक मनोविज्ञान का संबंधं व्यवहार की वैज्ञानिक खोज से है।"

मनोविज्ञान की शाखाएं: 

मनोविज्ञान एक प्रगतिशील विज्ञान है। शैशवकाल में होते हुए भी इस विज्ञान ने प्रयोग के क्षेत्र में अद्वितीय उन्नति की है। मनोविज्ञान को दर्शन का अंग समझा जाता है और दर्शनिकों द्वारा ही यह विज्ञान पढ़ाया जाता था। आज देश देशांतर में मनोविज्ञान की बड़ी बड़ी प्रयोगशालएं स्थापित हो चुकी है और बाल मनोविज्ञान, पशु मनोविज्ञान, चिकित्सा मनोविज्ञान अर्थात मनोविज्ञान के अंग अंग पर खोज या प्रयोग जारी है। कुछ ही वर्षों के समय में इस विज्ञान के अनेक विभाग हो चुके है और इन विभागों की मी अनेक शाखाएं उत्पन्न हो चुकी है। यों तो मनोविज्ञान की बहुत सी शाखाएं है किन्तु उनमें से मुख्य निम्नलिखित है


1. सामान्य मनोविज्ञान । 

2. पशु मनोविज्ञान | 

3. तुलनात्मक मनोविज्ञान | 

4. वैयक्तिक मनोविज्ञान । 

5. सामाजिक मनोविज्ञान । 

6. मनोविज्ञान अथवा विश्लेषण मनोविज्ञान। 

7 असामान्य मनोविज्ञान।

 8. चिकित्सा मनोविज्ञान । 

9. बाल मनोविज्ञान। 

10. उद्योग मनोविज्ञान। 

11. वाणिज्य मनोविज्ञान। 

12. शिक्षा मनोविज्ञान ।

शिक्षा और मनोविज्ञान का संबंध 

प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक स्किनर के अनुसार शिक्षा मनोविज्ञान का आरम्भ अरस्तु के समय से माना जा सकता है। शिक्षा मनोविज्ञान का सम्बन्ध सीखने एवं सीखने की विधियों अर्थात पढ़ाने से है। शिक्षा तथा मनोविज्ञान ज्ञान की दो स्पष्ट शाखाएं है. परंतु इन दोनो का परस्पर घनिष्ठ संबंध है आधुनिक शिक्षा का आधार मनोविज्ञान है। बच्चे को उसकी रूचियों, रूझानों, सम्भावनाओं तथा व्यक्तित्व का ध्यानपूर्वक अध्ययन करके शिक्षा दी जाती है आज शिक्षा तथा मनोविज्ञान एक दूसरे के पूरक है। स्किनर का मत है कि शिक्षा मनोविज्ञान शिक्षा का एक आवश्यक तत्व है इसकी सहायता के बिना शिक्षा की गुत्थी सुलझाई नहीं जा सकती शिक्षा तथा मनोविज्ञान दोनों का संबंध व्यवहार के साथ है। मनोविज्ञान की खोजों की शिक्षा के दूसरे पहलुओं पर गहरी छाप है। शिक्षा तथा मनोविज्ञान सिद्धांत तथा व्यवहार का समन्वय है, शिक्षा तथा मनोविज्ञान का पारस्परिक संबध का ज्ञान मानव के समन्वित संतुलित विकास के लिये आवश्यक है। शिक्षा के समान कार्य, मनोविज्ञान के सिद्धांतों पर आधारित है को एण्ड को के अनुसार 'मनोविज्ञान, वातावरण के सम्पर्क में होने वाले मानव व्यवहारों का विज्ञान है मनोविज्ञान सीखने से संबंधित मानव विकास की व्याख्या करता है। शिक्षा, सीखने की प्रक्रिया को करने की चेष्टा प्रदान करती है। शिक्षा मनोविज्ञान सीखने के क्यों और कब से संबंधित है। शिक्षा और मनोविज्ञान को जोड़ने वाली कही है मानव आहार इसमें दो विद्वानों के विचार दृष्टव्य है

1. ब्राउन शिक्षा वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति के व्यवहार में परिवर्तन किया जाता है।"

2. पिल्सबरी "मनोविज्ञान मानव व्यवहार का विज्ञान है। इन परिभाषाओं से स्पष्ट है कि शिक्षा और मनोविज्ञान दोनों का संबंध मानव व्यवहार से है। शिक्षा मानव व्यवहार में परिवर्तन करके उसे उत्तम बनाती है। मनोविज्ञान मानव व्यवहार का अध्ययन करता है। इस प्रकार शिक्षा और मनोविज्ञान के संबंध होना स्वाभाविक है पर इस संबंध में मनोविज्ञान को आधार प्रदान करता है। शिक्षा को अपने प्रत्येक कार्य के लिए मनोविज्ञान की स्वीकृति प्राप्त करनी पड़ती है। बी.एन. झा ने ठीक ही लिखा है "शिक्षा जो कुछ करती है और जिस प्रकार वह किया जाता है उसके लिये इसे मनोवैज्ञानिक खोजों पर निर्भर होना पड़ता है। मनोविज्ञान को यह स्थान इसलिए प्राप्त हुआ है क्योंकि उसने शिक्षा के सब क्षेत्रों को प्रभावित करके उनमें क्रांतिकारी परिवर्तन कर दिया है। इस संदर्भ में रायन के ये सारगर्भित वाक्य उल्लेखनीय है "आधुनिक समय के अनेक विद्यालयों में हम भिन्नता और संघर्ष का वातावरण पाते है। अब इनमें परम्परागत औपचारिकता, मजबूर, मीन, तनाव और दण्ड की अधिकता दर्शित नहीं होती है।" यह सब शिक्षा मनोविज्ञान के उपयोग के कारण समय हुआ है।

मनोविज्ञान का शिक्षा में योगदान:

1. बालक का महत्व। 

2. बालकों की विभिन्न अवस्थाओं का महत्व।

 3. बालकों की रूचियों व मूल प्रवृत्तियों का महत्व | 

4. बालकों की व्यक्तिगत विभिन्नताओं का महत्व । 

5. पाठ्यक्रम में सुधार। 

6. पाठ्यक्रम सहगामी क्रियाओं पर बल । 

7. सीखने की प्रक्रिया में उन्नति । 

8. मूल्यांकन की नई विधियां । 

9. शिक्षा के उद्देश्य की प्राप्ति व सफलता 

10. नये ज्ञान का आधारपूर्ण ज्ञान ।

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